Morning Walk कैसे शुरू करें? Beginners के लिए आसान गाइड

 मॉर्निंग वॉक के फायदे लगभग सभी जानते हैं। जानकारी की भी कोई कमी नहीं है। आज के तकनीकी युग में हर विषय पर भरपूर जानकारी उपलब्ध है। लोग पढ़ भी लेते हैं, लेकिन उसे अपने जीवन में लागू नहीं कर पाते। कुछ लोग शुरू करने की सोचते हैं, पर शुरुआत नहीं कर पाते, और जो शुरू कर भी देते हैं, वे अक्सर कुछ दिनों बाद छोड़ देते हैं।

आइए, इस विषय पर बात करते हैं।

सबसे पहले इसे दो बिंदुओं में बाँट लेते हैं, जिससे आपकी परेशानी का समाधान आसान हो सके—

शुरुआत कैसे करें?

शुरुआत करने के बाद इसे कैसे बनाए रखें?

1. शुरुआत कैसे करें?

सबसे पहले यह समझें कि आप मॉर्निंग वॉक को कितनी गंभीरता से लेते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि जो लोग इसे गंभीरता से लेते हैं, वे भी अक्सर इसे शुरू क्यों नहीं कर पाते?

मेरे अनुभव के अनुसार, किसी भी कार्य को करने से पहले उसकी योजना बनाना आवश्यक है।

सबसे पहले एक स्पष्ट योजना बनाइए कि आप कब से और कैसे शुरुआत करेंगे।

इस विचार को कि “मुझे रोज़ वॉक करनी है”, एक माली की तरह देखिए। जिस प्रकार माली पहले जमीन में बीज बोता है और फिर नियमित रूप से उसे पानी देता है, उसी प्रकार आपको भी अपने मन में इस आदत का बीज बोना होगा।

सबसे पहले माहौल बनाइए

रात में सोने से पहले किसी से यह बात कीजिए कि अगले सप्ताह से आप जल्दी उठकर मॉर्निंग वॉक शुरू करेंगे। यदि किसी से बात न करना चाहें, तो सोने से पहले कुछ मिनट तक स्वयं इस विषय पर विचार करें।

इससे आपका मन और मस्तिष्क इस नई आदत के लिए तैयार होने लगेंगे। कुछ दिनों तक ऐसा करने पर आप पाएँगे कि आपकी नींद उसी समय खुलने लगी है, जिस समय उठने का आपने निश्चय किया था।

यह कोई जादू नहीं, बल्कि आपके मन की शक्ति है। आज से ही इसका प्रयोग करके देखिए।

2. शुरुआत करने के बाद इसे कैसे बनाए रखें?

बहुत से लोग शुरुआत तो कर लेते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से पुरानी दिनचर्या में लौट जाते हैं।

इसका सबसे बड़ा कारण है कि इंसान परिणाम तुरंत चाहता है।

कुछ दिनों तक मेहनत करने के बाद लोग सोचने लगते हैं—“अरे, दो महीने हो गए, फिर भी कोई खास फर्क नहीं दिख रहा!” और फिर वे निष्कर्ष निकाल लेते हैं कि वॉकिंग का कोई फायदा नहीं है।

ऐसे समय में कुछ सलाहकार भी मिल जाते हैं, जो कहेंगे—“अगर सिर्फ वॉकिंग से ही सब कुछ हो जाता, तो हाथी कब का पतला हो गया होता!”

लेकिन यहाँ एक बात समझना बहुत जरूरी है।

शुरुआती समय में आपका ध्यान केवल नियमितता और मेहनत पर होना चाहिए। वॉकिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए।

यदि आपने अपनी डाइट में कोई बदलाव नहीं किया है, तो बार-बार वजन नापने वाली मशीन पर ध्यान न दें।

फैट कम होने का असर हमेशा वजन मशीन पर ही दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है।

यदि आपके कपड़े ढीले होने लगे हैं, शरीर का आकार बेहतर हो रहा है और आप स्वयं को अधिक ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं, तो समझ लीजिए कि सब सही दिशा में चल रहा है।

बस लगातार मेहनत करते रहिए और समय दीजिए। यकीन मानिए, दो साल बाद लोग स्वयं कहेंगे—“वाह! क्या बात है!”

शरीर को फिट होने में समय लगता है, इसलिए धैर्य रखें।

बस इतना ध्यान रखें कि अपनी डाइट को नियंत्रित रखें और आवश्यकता से अधिक भोजन न करें।

जहाँ तक वजन की बात है, हो सकता है कि वह बहुत अधिक कम न हो।

इसका कारण यह है कि व्यायाम और वॉकिंग से शरीर में नई मांसपेशियाँ (मसल्स) विकसित होती हैं। मांसपेशियाँ फैट की तुलना में अधिक घनी और भारी होती हैं। इसलिए कई बार वजन में बड़ा अंतर दिखाई नहीं देता, जबकि शरीर पहले से अधिक फिट और आकर्षक बन चुका होता है।

आपकी मेहनत समय के साथ आपके शरीर को बेहतर आकार दे रही होती है।

अतः लगे रहिए।

यदि परिणाम देखना ही है, तो केवल वजन मशीन पर निर्भर न रहें। आईने में देखिए, क्योंकि आईना झूठ नहीं बोलता।

हर तीन महीने में अपनी एक फोटो खींचिए और पुरानी फोटो से तुलना कीजिए।

यदि आपकी शर्ट और पैंट पहले की तुलना में ढीली हो रही हैं, तो इससे बेहतर प्रगति का प्रमाण और कुछ नहीं हो सकता।

नियमितता ही सफलता का रहस्य है। मॉर्निंग वॉक का सबसे बड़ा लाभ केवल फिट शरीर नहीं, बल्कि एक अनुशासित जीवन है।

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