क्यों बढ़ रहा है वॉकिंग का चलन? वॉकिंग का सही तरीका और तकनीक।
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| क्यों बढ़ रहा है वॉकिंग का चलन? |
वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि या यूँ कहें, व्यायाम करना सभी के लिए ज़रूरी हो चला है।
जब बात आती है कि हम कैसे एक्टिव रहें, तो सबसे सरल एक्टिविटी के तौर पर हमें वॉकिंग ही याद आती है। यह असरदार भी है, यदि इसे सही तरीके से किया जाए।
आइए समझें इसका सही तरीका।
इसके लिए किसी विशेष प्रशिक्षण या कोच की आवश्यकता नहीं है। इसलिए यह लोकप्रिय और चलन में भी है। बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो इसका लाभ आप उठा पाएँगे और एक शानदार, स्वस्थ व मज़बूत शरीर बना पाएँगे।
यदि आप नए हैं या अभी शुरुआत कर रहे हैं, तो शुरू में 1 से 2 km ही चलें, फिर इसे धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
चलते समय कमर को सीधा और लचीला रखें।
कुछ लोग लंबे समय से वॉकिंग कर रहे होंगे, लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा। यह शिकायत रहती है। ऐसे में आपको यहाँ इस बात पर ध्यान देना है कि वॉक की स्पीड बढ़ाएँ। एक km लगभग 11 मिनट में चलें।
वॉकिंग की शुरुआत धीमी गति से करें, फिर तेज़ चलें, फिर धीमी और फिर तेज़। इस रिदम में वॉकिंग करने से इसका फायदा बढ़ जाएगा।
एक समान सतह पर चलें। यदि जॉगिंग करना हो, तो सड़क पर करने से बचें और अच्छी क्वालिटी के जूते पहनें।
चलने की स्पीड के साथ हाथों की मूवमेंट पर भी ध्यान रखें।
नियमित रहें।
समय का चुनाव
वॉकिंग का समय सुबह या शाम, जो आपको उचित लगे, चुन लें। लेकिन मेरे अनुसार सुबह का समय उत्तम रहता है। इस समय यदि आप वॉकिंग करते हैं, तो दिनभर आप एक्टिव रहेंगे।
इस भागदौड़ भरे जीवन में अपने लिए एक घंटा वॉकिंग और व्यायाम को दीजिए और फिर देखिए, कैसे लाइफस्टाइल के कारण जो समस्याएँ आपको आ रही हैं, वे आपसे दूर भागती हैं।
बस, मैं यहाँ पर यही कहूँगा—
"व्यस्त रहो, मस्त रहो। चलते रहो, स्वस्थ रहो।"
