रोज 30 मिनट पैदल चलने से शरीर और मन में क्या बदलाव आते हैं?
रोज 30 मिनट पैदल चलने से शरीर और मन में क्या बदलाव आते हैं?
पैदल चलना और मॉर्निंग वॉक की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आज हम 30 मिनट प्रतिदिन पैदल चलने से शरीर और मन पर होने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
यदि आप चाहें, तो इस पैदल चलने की यात्रा को मन की शांति बढ़ाने वाली और प्रकृति से जोड़ने वाली यात्रा बना सकते हैं। ऐसा करने पर आप पाएंगे कि यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे आपको अध्यात्म की ओर भी ले जाने लगती है।
यदि आप ऐसा कर पाए, तो एक अद्भुत आनंद की अनुभूति कर सकते हैं।
चलिए जानते हैं कि यह कैसे करें और किन बातों का ध्यान रखें।
सबसे पहले अपनी सुविधा के अनुसार एक अच्छा समय चुनें। सुबह का समय इसके लिए सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि उस समय वातावरण शांत, स्वच्छ और सुकून से भरा होता है।
अब आपने समय का चुनाव कर लिया है। सुबह उठिए, तैयार होइए और अपने चुने हुए स्थान पर पहुँच जाइए। फिर इस 30 मिनट की पैदल यात्रा का आनंद लेना शुरू कीजिए।
अब आपको करना क्या है?
कुछ विशेष नहीं। बस चलते रहिए और अपने आसपास की प्रकृति का गहराई से अनुभव कीजिए। सुबह पक्षियों की मधुर आवाज़, पेड़-पौधों की हरियाली, फूल-पत्तों की सुंदरता और ताज़ी हवा का आनंद लीजिए। संभव है कि जीवन की व्यस्तता में आपने इन चीज़ों को महसूस करना लगभग छोड़ ही दिया हो।
आप पाएंगे कि ये सब अमूल्य हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रकृति के ये उपहार बिल्कुल निःशुल्क हैं। बस थोड़ी-सी नींद का त्याग और पैरों को थोड़ा-सा कष्ट देने भर से आप इनका आनंद ले सकते हैं।
सुबह की स्वच्छ प्राणवायु जब आप ग्रहण करेंगे और आसपास की प्रकृति को महसूस करेंगे, तो आपका मन प्रसन्न और आनंदित हो उठेगा। जैसे सावन के महीने में मोर नृत्य करने लगता है, वैसे ही मन भी भीतर से खिल उठेगा।
एक और बात—हर मौसम का आनंद उसी रूप में लेने का प्रयास कीजिए। सर्दियों में धुंध और ठंडक का, वर्षा ऋतु में हल्की फुहारों का और गर्मियों में सुबह की ठंडी हवा का आनंद उठाइए।
यदि आपने तीनों ऋतुओं में नियमित रूप से वॉक कर ली, तो तीनों मौसमों की सुबह की ताज़ी हवा आपके तन और मन को नई ऊर्जा से भर देगी।
देखते ही देखते पूरा एक वर्ष बीत जाएगा। लेकिन जब कैलेंडर बदलेगा, तो आपको यह दुख नहीं होगा कि "एक साल और निकल गया।" बल्कि आपको यह संतोष होगा कि बीता हुआ वर्ष सक्रियता और जागरूकता से भरा था। उसकी हर सुबह को आपने जिया, अपने शरीर को समय दिया और स्वयं को थोड़ा ही सही, लेकिन बेहतर बनाया।
और जब नया वर्ष शुरू हो, तो फिर एक नया लक्ष्य निर्धारित कीजिए। चलते रहिए। यह राह सुकून की है, प्रकृति की है और मन की शांति की है।
यहीं से आपके अंतर्मन की यात्रा प्रारंभ होती है।
यात्रा स्वयं की — बाहर से भीतर की ओर...
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