क्या वॉकिंग से बेली फैट कम हो रहा है? जानिए शरीर के सकारात्मक संकेत
चलो फिर से स्वास्थ्य के सफर पर
आप कहेंगे, "कौन-सा सफर भाई?"
वही स्वास्थ्य का सफर, जिस पर हम पहले भी बातें कर चुके हैं।
आज की चर्चा में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि वॉकिंग के दौरान हमें कौन-कौन से ऐसे संकेत मिलते हैं, जिनसे पता चलता है कि हमारा बेली फैट कम हो रहा है और हमारी मेहनत रंग ला रही है।
यदि किसी भी काम में निरंतरता रखी जाए, तो उसका फल मिलना तय है। जैसे पानी की एक बूंद भी यदि लगातार पत्थर जैसी कठोर सतह पर गिरती रहे, तो समय के साथ वहाँ छेद हो जाता है, चाहे सतह कितनी भी सख्त क्यों न हो।
तो फिर आपकी मेहनत भी बेकार क्यों जाएगी? कुछ न कुछ अच्छा तो अवश्य होगा।
सबसे पहले यह समझ लें कि शारीरिक गतिविधियाँ, जैसे तेज़ चाल से चलना (फास्ट वॉकिंग) या व्यायाम करना, आज की जीवनशैली को देखते हुए हमारे लिए अत्यंत आवश्यक हैं। कहने का अर्थ यह है कि इसका कोई विकल्प नहीं है।
आइए जानते हैं कि नियमित वॉकिंग से कौन-कौन से संभावित परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। यहाँ मैं अपने स्वयं के अनुभव के आधार पर बात कर रहा हूँ।
सर्वप्रथम, नियमित फास्ट वॉकिंग कुछ महीनों के बाद आपके शरीर के अंदर ऐसे सुधार करती है, जिन्हें आँखों से सीधे नहीं देखा जा सकता। शरीर भीतर से स्वयं को रिपेयर करना शुरू कर देता है।
दूसरा परिवर्तन, लगभग छह महीनों की निरंतरता के बाद आपके कपड़े ढीले होने लगते हैं। यह संकेत होता है कि आपका शरीर सही दिशा में बदल रहा है और बेहतर आकार ले रहा है।
तीसरा संकेत, समय के साथ शरीर का लचीलापन बढ़ने लगता है। इससे आप स्वयं अपने भीतर सकारात्मक बदलाव महसूस कर सकते हैं।
कुछ समय बाद ऐसा भी हो सकता है कि आप देखने में कुछ लोगों से अधिक मोटे लगें, लेकिन वास्तव में उनसे अधिक स्वस्थ हों।
मुझे यह अनुभव तब हुआ जब मेरे बॉडी चेकअप में मेरा कोलेस्ट्रॉल स्तर कई पतले लोगों की तुलना में कम निकला।
क्योंकि कुछ लोगों में हिडन ओबेसिटी (Hidden Obesity) होती है। वे देखने में पतले होते हैं, लेकिन उनके शरीर में वसा का प्रतिशत अधिक हो सकता है। ऐसे लोग अक्सर सोचते हैं कि वे तो पहले से ही फिट हैं, उन्हें वॉकिंग या वर्कआउट की क्या आवश्यकता है।
जबकि आप अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो चुके होते हैं और आलस्य के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण लड़ाई जीत चुके होते हैं।
इसलिए यह सोचकर चिंतित न हों कि आपका बेली फैट अभी कम नहीं हो रहा है। परिवर्तन हो रहा है, बस उसे दिखने में समय लगता है। यह प्रक्रिया शरीर के भीतर लगातार चल रही होती है।
धैर्य रखिए।
आपका प्रयास अवश्य रंग लाएगा। इसकी केवल एक ही कुंजी है — निरंतरता।
अतः यदि आप मॉर्निंग वॉक कर रहे हैं, तो उसे नियमित बनाए रखें। लगभग 12 महीनों में स्पष्ट अंतर दिखाई देने लगेगा और 18 महीनों में शरीर में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
तो फिर मिलते हैं स्वास्थ्य के इस सफर के अगले पड़ाव पर...
To Be Continued...
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